Saturday, 27 June 2015

AshokLav Interacted with MBA Students of Apeejay School of Management,Dwarka

“ देश केवल ज़मीन का टुकड़ा नहीं है, यह हमारी आत्मा में बसा भाव है. इसके साथ ऐसा अपनत्व होता है कि इसके लिए प्राण तक न्यौछावर करने में सैनिक हिचकिचाते नहीं हैं. हम जहाँ भी, जिस रूप में भी कार्य कर रहे हैं हमें ऐसे कोई भी कार्य नहीं करने चाहिए जिससे देश का अहित हो, देश के सम्मान को ठेस पहुँचे.”- वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षाविद् अशोक लव ने एपीजे स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, द्वारका,नई दिल्ली के एम.बी.ए. के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा. ‘ सत्र 2015-17 विद्यार्थियों के साथ संवाद ‘ के अंतर्गत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
इससे पूर्व संस्थान के निर्देशक डॉ. आलोक सकलानी ने अशोक लव का स्वागत करते हुए कह कि अशोक लव बहुमुखी प्रतिभा संपन्न हैं. वे कवि हैं, लेखक हैं, शिक्षाविद् और समाजसेवी हैं. उनकी 125 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. उनके साहित्य पर पी.एच.डी. और एम.फिल. हिया हैं. वे तीस वर्षों तक अध्यापन से संबद्ध रहे हैं.
अशोक लव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन मनुष्य के भावी जीवन का आधार होता है. यह फिसलन भरा होता है. इस पर बढ़ते हुए टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों से गुज़ारना पड़ता है. अनेक प्रलोभन अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन सबके मध्य अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रखना चाहिए. साधनहीन एकलव्य ने अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रकह और निरंतर अभ्यास से श्रेष्ठ धनुर्धर बना. एकलव्य मैनेजमेंट का विद्यार्थी नहीं था. उसने जीवन से प्रबंधन सीखा, मैनेजमेंट सीखा. मैनेजमेंट का अर्थ ही जीवन को सुव्यवस्थित ढंग से जीना है. अपने कार्यों का सुप्रबंधन करना है.
उन्होंने कहा कि देश हमारे लिए सर्वोपरि है. इसके सम्मान के साथ हमारा सम्मान जुडा हुआ है. जब देस पराधीन था तो देश के प्रत्येक नागरिक पर पराधीनता का कलंक लगा हुआ था. हमें इसे स्मरण रखना चाहिए. भारत महान देश है. इसके संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं किया गया. ऐसी योजनाएँ नहीं बनाई गईं जिनसे देश विश्व के विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आता. आप विद्यार्थी जीवन के पश्चात समर्पित भाव से कार्य करके देश को उच्च शिखरों तक ले जाएँ. अपने सामने सदैव देश को रखें.
अशोक लव ने अपने अमेरिकी प्रवास के अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वहाँ भारतीयों का बहुत सम्मान है. भारतीय परिश्रमी और प्रतिभावान हैं. आई.टी. क्षेत्र में कार्यरत इंजीनियर, डॉक्टर, व्यवसायी सबके समर्पित भाव से कार्य करने के कारण ऐसा हुआ है. उनके सम्मान का अर्थ है भारत का सम्मान.  वहाँ बसे भारतीय हर साँस के साथ भारत को जीते हैं. हम यहाँ भारत में रह रहे हैं. हमारा कर्तव्य हो जाता है कि हम अपने कार्यों से देश और भारतीय संस्कृति की गरिमा को बढ़ाएँ. आज शिक्षा का स्वरूप बदल गया है. केवल साइंस या कामर्स ही नहीं अपितु आर्ट्स विषयों के साथ भी उच्च पदों पर पहुँचा जा सकता है. एम.बी.ए. बहुत महत्त्वपूर्ण विषय बन गया है. आई.टी. हो, चिकित्सा हो, डिफेंस हो  आज सब एम.बी.ए. अवश्य करते हैं. आप इसे गंभीरता से लें, मन लगाकर खूब पढ़ें. आपकी उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ ! साहित्यकार अशोक लव ने विशेष अनुरोध पर अपनी कुछ कविताएँ भी सुनाईं. संस्थान की ओर से डॉ.आलोक सकलानी ने उन्हें सम्मानित किया.